ग्रहस्थ जीवन कठिन अवश्य है ।लेकिन ,भगवत प्राप्ति का साधन उतना सरल भी है।

ग्रहस्थ जीवन कठिन अवश्य है ।लेकिन ,भगवत प्राप्ति का   साधन  उतना सरल भी है।

गुरुदेव श्री चन्द्रप्रभु  ।। 

 

ग्रहस्थ जीवन कठिन अवश्य है ।लेकिन ,भगवत प्राप्ति का   साधन  उतना सरल भी है।

इसमे ........।।

भक्ति में तन की बाती ,

मन की ज्योत जलाओगे ,

तभी आत्मा प्रसन्न होगी ।

केवल ईश्वर भक्ति कर भव सागर से पार हो सकते है ।

याद रखे भव सागर ऊपर नही यही पर है ,संसार ही भव सागर है । जन्म से म्रत्यु तक का समय पार करने में ही लग जाता है ।

मनुष्य ग्रहस्थ जीवन मे इंद्रिय साधनों का  अनुभव लेकर ग्रहस्ती के नियमो का पालन कर ,भक्ति मार्ग से मोक्ष को प्राप्त कर सकता है ।

किन्तु मनुष्य इन इन्द्रियों के वशीभूत होकर अनुभवी होते हुए भी ममता,मोह,अहंकार,क्रोध ओर माया में फंसा रहता है ।

ग्रहस्थ जीवन को सफल और उन्नत बनाने के लिए ये गुण होना चाहिए ......।

जैसे सच्चाई ,न्याय प्रियता ,धैर्य, दृढ़ता,साहस,दया,क्षमा, परोपकार आदि ।

इन गुणों से स्वयंम ओर दुसरो को भी लाभ मिलता है ।

उदार वृत्ती वाला ग्रहस्थ दूसरे के दुःख से दुःखी होता है ।उसे अपने सुख दुःख की उतनी चिंता नही रहती ,जितनी दुसरो के सुख दुःख की रहती है ।

भगवान बुध्द ने अपने दुःखो के निवारण के लिए संसार को नही त्यागा ।अपितु संसार के सभी प्राणियों को दुःखो से मुक्त करने के विचार से राज प्रसाद त्याग दिया ।

जीव सेवा से ही ईश्वरत्व प्राप्त किया ।ऐसे व्यक्ति ही नर श्रेष्ठ कहलाते है ।

 

श्री कृष्णम वन्दे जगतगुरु ।।

श्री सद्गुरु सेवा संस्थान इन्दोर ।।