प्रिंसिपल बधौतिया- आरोप है- सैंपलिंग कम हो रही है, आंकड़े छिपाए भी जा रहे हैं

प्रिंसिपल बधौतिया- आरोप है- सैंपलिंग कम हो रही है, आंकड़े छिपाए भी जा रहे हैं

काेरोना को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन शहर में अब भी हर दिन कोरोना के 70-80 नए मरीज मिल रहे हैं। रोज औसतन दो मरीजों की मौत हो रही है। शहर अब भी रेड जोन में शामिल है। देश का हॉट स्पॉट बना हुआ है। लॉकडाउन-4 में भी सख्ती जारी है। वहीं, प्रशासन कोरोना की जांच के लिए सैंपलिंग कभी ज्यादा तो कभी कम कर देता है। लोगों के मन में सवाल है कि नए मरीज और मौतों का सिलसिला कब रुकेगा? शहर फिर से सामान्य हो पाएगा या नहीं? इन सवालों को लेकर भास्कर के आग्रह पर डेली कॉलेज के प्रिंसिपल नीरज बधौतिया ने कलेक्टर मनीष सिंह से टेलीफोन पर इंटरव्यू कर जवाब जाने।

बधौतिया :इंदौर को क्लीन सिटी का दर्जा आपके निगमायुक्त रहते ही मिला। अब यही शहर कोरोना का रेड जोन भी बन गया। आपको लगता है कि कहीं गलती हो गई गई, जिसे सुधार लेते तो बेहतर होता?

सिंह : जनवरी-फरवरी में कई लोग दुबई, मलेशिया गए और दिल्ली, मुंबई होते हुए इंदौर आए। उनकी स्क्रीनिंग नहीं होने से संक्रमण शहर में फैला। उस समय अधिक जांच होती और यात्रियों को होम आइसोलेट करते तो बेहतर होता। हालांकि स्थिति अब नियंत्रण में है। भले ही मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन ठीक भी हो रहे हैं। हम कोरोना फ्री भी होंगे।

बधौतिया : शहर में कोरोना मरीज ढाई हजार से ज्यादा हो गए। इसकी क्या वजह रही?
सिंह : फरवरी-मार्च में ही कोरोना का प्रभाव शहर में हो गया था। उस समय टेस्टिंग 40 मरीजों की ही हो रही थी। हमने अप्रैल के पहले सप्ताह से सैंपलिंग और टेस्टिंग पर जोर दिया। जो संक्रमण फैला हुआ था, वह सामने आने लगा। उस समय मरीजों का पता चलने में देरी हो रही थी। स्थिति गंभीर होने के बाद ही मरीज सामने आ रहे थे। इसलिए शुरुआत में मृत्यु दर ज्यादा रही। उस समय सैंपलिंग, टेस्टिंग के साथ चुनौती थी कि इलाज हो। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन पर ध्यान दिया। 
बधौतिया : खबरें आ रही हैं कि इंदौर में भोपाल की तुलना में कम सैंपलिंग हो रही है?   
सिंह : हां, यह सही है। हम रोज 20 हजार की सैंपलिंग कर सकते हैं, पर इनकी टेस्टिंग में देरी होगी। ऐसे में हाई रिस्क मरीजों की रिपोर्ट देर से मिलेगी। इसलिए मरीज के संपर्क वाले जो भी लोग हैं, उनकी सैंपलिंग कर रहे हैं। यह आईसीएमआर की गाइडलाइन भी है। जहां जरूरी लगा, वहां ज्यादा सैंपल लिए। एक दिन में 1700 तक भी लिए।
बधौतिया : आरोप कि सैंपल छिपाए जा रहे हैं। लंबे समय तक रिपोर्ट नहीं आ रही है। 
सिंह : 5 मई से सभी रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड हैं, जो दूसरे शहरों में नहीं हुआ। अब शहर में ही जांचने वाले सैंपल की रिपोर्ट 24 घंटे में आ जाती है। जिन्हें बाहर भेज जाता है, उनकी रिपोर्ट अधिकतम तीन दिन में आ जाती है।

बधौतिया: मरीज अब भी बढ़ रहे ऐसा क्यों?
सिंह : मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन यह चिंता की बात नहीं है। अब मरीज जल्द पहचान में आ रहे हैं। उनका इलाज हो रहा है। पॉजिटिव रेट कम हुआ। रिकवरी दर बढ़ी और मौत भी कम हुई।
बधौतिया : 85 में से 79 वार्ड कोरोना संक्रमित हो गए हैं। शहर में कम्युनिटी संक्रमण की स्टेज आ गई है? 
सिंह : ऐसा नहीं है। हालांकि यह सही है कि अप्रैल मंे पीक दौर था, जब कुछ मोहल्लों से ज्यादा मरीज सामने आए। इसका कारण यह रहा कि एनआरसी आंदोलन म्ैँ आने-जाने पर रोक नहीं थी। मूवमेंट ज्यादा होने पर कोराेना कुछ फोकस सेंटर पर फैल गया। अब वैसी स्थि॑॑ति नहीं है।
बधौतिया : कोरोना के जून-जुलाई में पीक पर आने का बात हो रही है। इसके लिए क्या तैयारी है? 
सिंह : सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तैयार करवा रहे हैं। दूसरे अस्पतालों की क्षमता बढ़ा रहे हैं।
बधौतिया : व्यापारी परेशान हैं। छूट मांग रहे हैं। किस तरह आर्थिक गतिविधियां बढ़ा रहे हैं? 
सिंह : आवश्यक सेवा वाले सभी कारोबार लॉकडाउन में भी खुले रखे हैं। इंडस्ट्री को मंजूरी दे दी है। आगे भी सिंगल ऑर्डर से मानक तय करते हुए इंडस्ट्री और रियल एस्टेट कारोबार को मंजूरी देने पर काम कर रहे हैं। जो भी ऑनलाइन डिलीवरी और घर पहुंच सेवा की बात कह रहा है, उसे मंजूरी दे रहे हैं। यह सख्ती इसलिए क्योंकि हमारी जांच में आया है कि बाजार में जाने से भी लोग संक्रमित हुए। 

बधौतिया : पीपीई किट और डॉक्टर पर्याप्त हैं क्या?
सिंह : बिल्कुल, पीपीई किट और डाॅक्टर दोनों की कोई समस्या नहीं है। ये पर्याप्त संख्या में हैं।
बधौतिया : अब जब कोरोना संक्रमण के साथ ही जीना है तो लोगों को क्या एहतियात बरतना चाहिए?  
सिंह : इसके िलए मैंने एक मानक प्रक्रिया जारी की है। लोगों को बस मास्क लगाना है। हर समय दो गज की सामाजिक दूरी रखना है। छोटी-छोटी बातों का पालन करना है। यह मानकर ही घर से बाहर निकलें कि हर जगह कोरोना वायरस है। घर मंे सामान या कोई आए तो संक्रमित मानकर ही व्यवहार करें और सैनिटाइज करें। सतर्कता रखेंगे तो इससे बच सकते हैं। 
बधौतिया : बच्चों के स्कूलों का क्या होगा। खासकर, सरकारी स्कूल?
सिंह : अभी तो सलाह यही है कि स्कूल वाले आॅनलाइन सत्र ही चलाएं। जुलाई के बाद स्थिति सामान्य होने पर ही इन्हें खोलने पर विचार कर सकते हैं। 
बधौतिया : ऐसे में तो सरकारी स्कूल भी खुलना संभव नहीं है। अभी तो परीक्षाएं होना हैं। इसके लिए सेंटर बनेंगे। फिर संक्रमण नहीं फैलेगा क्या? 
सिंह : परीक्षा से ज्यादा जरूरी स्वास्थ्य है। उस समय लगा कि फिर संक्रमण हो सकता है तो सरकार निश्चित तौर पर विचार करेगी।
बधौतिया : इस समय आप अभी किस तरह फैसले ले रहे हैं?
सिंह : मैंने अप्रैल के महीने में जो दबाव सहन किया, वैसा मेरे साथ पूरी नौकरी में कभी नहीं हुआ। इस समय तो फोन पर बात करते में ही 15 घंटे बीत जाते हैं, लेकिन बात करने से रास्ता निकलता है और फैसला लेने में भी आसानी होती है। इसलिए यही कर रहा हूं।