पहले हम श्रेष्ठ व्यक्ति के विषय मे चर्चा करेंगें ।श्रेष्ठ व्यक्ति कैसे होते है ? उनके गुणों के बारे में समझें।

पहले हम श्रेष्ठ व्यक्ति के विषय मे चर्चा करेंगें ।श्रेष्ठ व्यक्ति कैसे होते है ? उनके गुणों के बारे में  समझें।

गुरुदेव श्री चन्द्रप्रभु !!

 

जीवन का एक आध्यात्मिक विश्लेषण यह भी है ।

श्रेष्ठ व्यक्ति और निम्नश्रेणी के व्यक्ति ।

 !! श्रेष्ठ व्यक्ति की पहचान !!

 

पहले हम श्रेष्ठ व्यक्ति के विषय मे चर्चा करेंगें ।श्रेष्ठ व्यक्ति कैसे होते है ? उनके गुणों के बारे में  समझें।

जीवन मे दुसरो को दोष देने वाला कभी सफल नही हो सकता । श्रेष्ठ मनुष्य वही है ,जो असफल होने पर भी दूसरों को कभी दोष नही देता। और सफल होने पर भी दूसरों की कभी हसीं नही उड़ाता । व्यक्ति के गुणों के आधार पर ही उसका   मूल्यांकन करता है ।

जो दृढ़ निश्चयी ,विरोधियों से झगड़ा नही करनें वाला।सभी

से प्रेम से मिलने वाला, सद्गुणों को संचय करने वाला , सदैव प्रसन्न रहने वाला अहंकार से दूर रहने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ कहलाता है । 

जिससे सहायता सहज ही प्राप्त की जा सकती है ।

खुशामद से नही सच्चाई से ही उत्तम पुरुष खुश होते है ।

स्वयं में ही दोष ढुढने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ है ।

सबसे मित्रता का व्यवहार रखने वाला, परन्तु मोहपाश में नही फसने वाला पुरुष ही श्रेष्ठ है। 

श्रेष्ठ पुरुष अपनी योग्यता को ही अपना धन समझता है ।

श्रेष्ठ व्यक्ति  में सदैव शांती और गम्भीरता विद्यमान रहती है ।

 !! निम्न, साधारण व्यक्ति की पहचान !!

 असफल होने पर दुसरो को दोषी ठहरता है ।

असफल लोगो की हंसी उड़ाने वाला निम्न व साधरण होता है ।

अंध विश्वासी, अपने विचारों को दूसरों पर थोपने वाला ।

विरोधियों से झगड़ा करते फिरता है ।वही तो निम्न श्रेणी का पुरूष कहलाता है ।

अवगुणों को संचित करता है ,सदैव अप्रसन्न,अहंकारी रहता है ।निम्न साधारण व्यक्ति कहलाता है।

निम्न श्रेणी का व्यक्ति सदैव काम निकालने की फ़िकर में रहता है ।किसी की सहायता यूही नही करता बड़ी कठिनाई से करता है ।

खुशामद से प्रसन्न रहता है ।

सदैव स्वयंम का ही फायदा सोचता है ।

निम्न श्रेणी का व्यक्ति अपनी दुर्बल इच्छाओं की पूर्ति सत्य असत्य किसी भी तरह से करने में ही प्रसन्न रहता है ।

स्वंय को कभी दोषी नही ठहरता। दुसरो को दोष देता रहता है ,निंदा करते रहता हैं।

मित्रता का व्यवहार भी बिना मतलब के नही रखता ।

मायामोह में लिप्त रहने वाला व्यक्ति ही निम्नगुणों का होता है।वह ज्यादा लोगो सेसम्बन्ध नही रखता ।

ऐसे व्यक्ति के प्राण धन में ही अटके पड़े रहते है । सदैव चिंतित,द्वेषी,अहंकारीअकेला अपने स्वार्थ में फंसा व्यक्ति ही निम्न श्रेणी में आता है ।

 

श्री कृष्णम वन्दे जगत गुरू !

श्री सद्गुरु सेवा संस्थान इंदौर