लॉकडाउन में बॉडी एक्टिविटी कम होने से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी

लॉकडाउन में बॉडी एक्टिविटी कम होने से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी

लॉकडाउन में बॉडी एक्टिविटी कम होने से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी

लोगों की रेस्ट हार्ट रेट पहले के मुकाबले काफी बेहतर 
बिच्छू डॉट कॉम
लॉकडाउन की वजह से बहुत से लोगों की शारीरिक कसरत वगैरह बंद है और लोग घरों में रहने के लिए मजबूर है। लेकिन दिल की सेहत को दुरूस्त रखने के लिए जरूरी है कि शारीरिक तौर पर खुद को एक्टिव रखा जाए। लेकिन इस लॉकडाउन में जब बाहर निकलने पर पाबंदी है तो लोगों को चिंता सता रही है कि कहीं वॉक पर न जाने और दिनभर घर में बैठे रहने की वजह से उनकी सेहत पर असर न पड़े। लेकिन लोगों की इस चिंता को दूर करने के लिए एक राहत भरी खबर आई है। रिपोर्ट में पता चला है कि इस लॉकडाउन में लोगों की रेस्ट हार्ट रेट पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है।
एक रिपोर्ट में इस बात का पता चला है कि लॉकडाउन में भी दुनिया भर के लोगों का रेस्ट हार्ट रेट पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुआ है। अमेरिका में किए गए सर्वे में जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीने में लोगों के रेस्ट हार्ट रेट को जांचकर उनको कंपेयर किया गया। जिसमें इस बात की जानकारी मिली कि पहले के मुकाबले इस समय रेस्ट हार्ट रेट लोगों की बेहतर हुई है। लेकिन ये रेस्ट हार्ट रेट होता क्या है? तो आगे की स्लाइड में जानें क्या है रेस्ट हार्ट रेट और कैसे ये काम करती है।
रेस्टिंग हार्ट रेट: दिल की प्रति मिनट धड़कने
दिल की प्रति मिनट धड़कने जो आप अपने आराम के समय में लेते हैं उसे रेस्ट हार्ट रेट कहते हैं। ये हार्ट बीट या दिल की धड़कन आपके सेहत का पैमाना है। क्योंकि इसकी वजह से आपका फिटनेस लेवल और दिल की सेहत पता चलती है। रेस्ट हार्ट रेट की मदद से दिल से जुड़ी कोई भी परेशानी चाहे वो नींद ना आने की समस्या हो, स्ट्रेस लेवल हो या फिर डिहाइड्रेशन का पता चल जाता है।
युवाओं में रेस्ट हार्ट रेट 1.26 प्रति मिनट तक कम
मार्च के महीने से ही ये हार्ट रेट घटना शुरू हो गई थी, जो अप्रैल के महीने बढ़कर दोगुनी हो गई। रिपोर्ट में पता चला कि युवाओं यानी 18 से 19 साल की उम्र के लोगों को में औसत रेस्टिंग हार्ट रेट 1.26 प्रति मिनट तक घटी है। वहीं ये कमी केवल युवाओं में ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोगों में देखने को मिली है। आराम के समय में दिल की धड़कनों को मापने के लिए लोगों के सोने के नियम और कितनी देर वो एक्टिव रहते हैं जैसी दिनचर्या को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट में पता चला है कि लोगों के घरों में आराम से रहने के दौरान भी जब लोगों की फिजिकल एक्टीविटी भी कम हुई है तो रेस्टिंग हार्ट रेट में काफी सुधार हुआ है।