विद्वान लोग कहते है । मनुष्य को चार आश्रमों से गुजरना पड़ता है

विद्वान लोग कहते है । मनुष्य को चार आश्रमों से गुजरना पड़ता है

गुरुदेव श्री चन्द्रप्रभु ।।

 

विद्वान लोग कहते है । मनुष्य को चार आश्रमों से गुजरना पड़ता है ।

१ ब्रह्मचर्य २ग्रहस्थाश्रम ३वानप्रस्थ ४सन्यास ।

प्रथम तो मै इतना ही कहूंगा कि पहला ब्रम्हचर्य ,ब्रम्ह सरिकी चर्या।ब्रम्ह जैसा आचरण की शिक्षा ।

फिर चौथा सन्यास कैसा ? 

चौथा तो ब्रम्हचर्य कि शिक्षा के साथ गृहस्थ का अनुभव दोनों का मेल ।केवल वान प्रस्थ जाने की तैयारी नही हो सकता ।वह तो  चौथा आश्रम  स्वयंम ब्रह्मचर्य , स्वयम ब्रह्मजेसा आचरण करने वाला मनुष्य बन जाता है ।

अर्थात स्वयंम ब्रह्म बन जाता है ।

 " अहम ब्रम्हसी  "

यदि ऐसा नही होता तब क्या

 होता है ?

मनुष्य की सात इन्द्रियाँ जो मै समझता हूँ ।

प्रत्येक को जाग्रत हो ने में 7---7 वर्ष का समय लगता है।प्रथम की जागृति पर जीव को जीनेकी लालसा ,माता,पिता भाई बहन ,आदि को पहचानना ।दुसरीं में उन्नति कर मार्ग पर चलने की जागृति के साथ आकांक्षाओ का बढ़ना प्रारम्भ होता है ।

ओर तीसरे चरण के इन्द्रिय जाग्रति मे प्रेम वासना में मनुष्य घिर जाता है ।जब१४से २१ वर्ष की आयु हो जाती है।तब शादि कर ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश पाता है।

चौथे ओर पांचवे चरण मे वह धन कमाने में लग जाता है ,ओर माया के चक्कर मे पड़ जाता है ।

छटे चरण में बच्चो की शादि,ओर जीवन के बचे हुए कार्यो से निवृत्त होना चाहता है।

सातवी इन्द्रिय जाग्रत ४२से४९ वर्ष की उम्र तक होना है,मन मे ईश्वर भक्ति का अंकुर फूटता है ।

लेकिन यह साराउस जीव पर निर्भर करता है कि वह सारी इन्द्रिय चरण को पार किया कि नही ?भक्ति के उस अंतिम चरण तक पहुँचा भी है कि नही ? 

या कोन सी इन्द्रिय चरण में बीच मे ही अटका पड़ा है 

१ क्या बुढ़ापे मे भी बचपने जैसी हरकते है ?

२ क्या बुढ़ापे में भी स्त्री  प्रेम रोगी है ?

3क्या बुढ़ापे में भी धन का लोभ है ? 

४क्या बुढ़ापे में बच्चे, नाती ,पोतों के प्रेम जाल में फंसे हो ? 

5 क्या बुढ़ापे तक अपने शरीर से प्रेम करते हो ?

इनमे से कहीं पर भी अटके लोग आपके आस पास नजर आ ही जाएंगे ।

किन्तु प्रथम ब्रम्हचर्य आश्रम  की शिक्षा का लाभ तभी होगा जब प्रत्येक चरण आपके साफ सुथरे हो ।

तभी अंतिम आश्रम सन्यास नही ब्रम्हचर्य , ब्रह्म जैसे आचरण वाला ,ब्रम्हचारी होंगे।

 "त्वम ब्रह्मसी " ।

" अह्म ब्रह्मसी" ।

 

श्री कृष्णम वन्दे जगत गुरु 

श्री सद्गुरु सेवा संस्थान इन्दोर ।