25 साल में मिनी मेगा सिटी बनेगा इंदौर

25 साल में मिनी मेगा सिटी बनेगा इंदौर

सरकार ने इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी (महानगर) के लिए जिस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, उसे लेकर विशेषज्ञों का मत है कि इसमें पूर्व में बने प्रस्ताव के हिसाब से ही प्लानिंग एरिया शामिल करना था। अब एक दिक्कत ये आएगी कि महू-पीथमपुर वाला जोन तो बेहतर तरीके से विकसित होगा, पर उज्जैन रोड और धार रोड के क्षेत्र में उस तरह योजना नहीं बन सकेगी। पहले तैयार प्रस्ताव में उज्जैन रोड पर सांवेर तक, धार रोड पर घाटा बिल्लौद, देवास रोड पर शिप्रा और महू-पीथमपुर को मेट्रोपॉलिटन में शामिल कर शहर का प्लानिंग एरिया 1600 वर्गकिमी करने की योजना थी।

इसे बाद में तत्कालीन सरकार ने संशोधित किया और पूरे उज्जैन शहर को प्लानिंग एरिया में जोड़ दिया। इससे क्षेत्रफल 1600 से बढ़कर 2000 वर्ग किमी हो गया। अब सरकार ने सिर्फ महू-पीथमपुर के नगरीय निकाय व पंचायतों को जोड़ा है। मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के लिए संघर्ष करने वाले एक्सपर्ट अजीत सिंह नारंग का कहना है कि महानगर के जिस स्वरूप को मंजूरी दी है, उससे एक जैसे विकास की मंशा ही खत्म हो जाएगी। 25 साल में इंदौर मिनी मेगा सिटी बन जाएगा, तब इसकी आबादी 50 लाख से अधिक होगी। ऐसे में हमें दूसरे महानगरों से सबक लेकर अभी से उसकी प्लानिंग पर काम करना चाहिए।

रिंग रोड को ही बना दिया था बायपास
नारंग के मुताबिक, 1986 में जब एबी रोड के वैकल्पिक रोड की योजना पर काम शुरू हुआ तो सरकार ने पूर्वी रिंग रोड को ही बायपास घोषित कर दिया था। तब इस पर लड़ाई लड़ी और बायपास अलग से नोटिफाई करवाया। अब वह बायपास भी शहर को कम पड़ रहा है। इसी तरह अगर मेट्रोपॉलिटन में सांवेर, घाटा बिल्लौद, शिप्रा तक के क्षेत्र नहीं लिए तो भविष्य में ऐसी दिक्कत विकास योजना में आएगी। ये प्रस्ताव एक हिस्से को विकसित दूसरे को अविकसित छोड़ देगा।